बात उन दिनों की थी जब सबकुछ सही चल रहा थामाँ वायोलिन सिखाती थी उन्होंने हमेबहुत कम उम्र में ही संगीत सिखाया था हम इतने माहिर हो गए किउनके अनुपस्थिति में हम बच्चों को संगीत सिखाते थे ,
मुझे माँ की उस ग्रूप में एक लड़की बहुत पसंद थी उसका नाम आशालता था वो मलयाली थी उनके पिताजी उसे लताजी और आशाजी jजितनीबड़ी गायिका बनाना चाहते थे जब भी मैं जी टीवी का सा रे गा मा पा प्रोग्राम्देखती हूँ तो आशालता की याद आती है काश उस समय भी ऐसे प्रोग्राम्स होते ,हमारी माँ के संगीत के क्लास में कई विद्यार्थी उसमे भाग लेते और मेरा दावा है की प्रतियोगिता जीतते भी
इस ब्लॉग में बहुत कुछ लिखना बाकी है पर अभी के लिए इतनाही \
Monday, September 14, 2009
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