Friday, August 28, 2009

श्रधांजलि

हम नए घर आगये तीन मंजिलो का एक ब्लाक था हर मंजिल में चार घर थे हमारे पड़ोसी एक बंगाली परिवार था ,मैं बी.ए.मेरी बाद वाली बहन बी.यस.सी.,उसकी बाद वाली बहन ८ वीउसके बाद वाला भाई ५वी पड़ रहे थे ननिहाल से नानी आकर हमारे बुरे दिनों में हमारा साथ दिया चारो ओर भविष्य अगम्य था गरीबी ,और कमियों का कोई अंत नही था सुब हमें दया भरी नजरों से देखते थे ,हमारे लिए चिंतित रहते थे
हम चारो बच्चे एक दुसरे की हिम्मत बनकर उन दिनों का डटकरसामना किया छेह महीनो के बाद मेरी शादी हो गई साल भर में मैं एक प्यारी सी बच्ची की माँ बन गई एक साल के बाद मेरी दूसरी बहन की शादी हो गई उसके दो लड़के हुए उसके चार साल बाद तीसरी बहन की भी शादी होगई जिसके एक लड़की और एक लड़का हुवे उसके आठ साल बाद मेरे एकलौते भाई की शादी हुई वोह इंजिनीअर बन गया ,उसकी दो प्यारी सी बेटियाँ है हम सुब बहुत खुश है पर यह सब देखने के लिए माँ नही हैचार साल पहले उनका अचानक देहांत हो गया आज हम जो भी है ,उनकी ही कृपा और असीम कृषि है वोह जहा भी है हमें आशीर्वाद दे रही है यह लेख उनकोमेरी श्रधांजलि hai

3 comments:

  1. माँ का स्थान दुनिया में दुसरा कोई नहीं ले सकता.
    आपने संस्मरण लिखा, ये उनको श्रधांजलि है.

    -सुलभ ( यादों का इंद्रजाल )

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  2. hummm bahut khoob sanjoya hai aapne yadon ko likhte rahen... hindi jagat main aapka swagat hai....

    Jai Ho mangalmay ho

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  3. भाव से परिपुर्ण बहुत ही सुन्दर रचना।


    बहुत ही सुन्दर अहसासों से भरी रचना.
    Bahut Barhia...


    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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