Thursday, August 13, 2009

पिताजी


- इस जिंदगी के अलग अलग पड़ावों में कई लोग मिलेइतने अलग -अलग तरह के सोचने वाले ,उनका पहनावा,विचार,जीने के तरीके ,बोलने ,उठने बैठने के तरीके लोग पुरी तरह से जीने के मजे नही लेते हमेशा एक डर उनके अन्दर समाया रहता है कल कैसे होगा ,क्या मेरी कोई मदद करेगा या नही इस कश्म कश में सारी जिंदगी निकल जाती है ,कब जिंदगी उनको छोड़ देती है उनको पता ही नही कितने अधूरे काम ,सपने छोड़ कर मानुष निकल जाते है
पिताजी यह एक शब्द ही नही हैहमारे लिए एक पुस्तक है ,सबकुछ उसमे समाया है ,आज हम जो भी है उनकी ही मार्गदर्शन मे ही चल कर बने हैहमारे जिंदगियों मे कई खुशी और गम का हमने डट कर सामना किया ,कभी हार नही मानीहमेशा इन तीस सालो में उनकी आत्मा हमें राह दिखाकर हमे शक्ति दी है
मुझे कभी भी याद नही है कि तीन लड़किया उनके लिए परेशानी होउन्होंने हमें एक दोस्त के ही समान माना ,हमेशा हमारे मांगो को पूरा किया ,किसी बात पर हम चिंतित होते तो इतनी शक्ति दी कि कभी भी उस विषय के लिए कोई शक नही रहता था
हम आज कही भी ,किसीसे भी बेधड़क मिल कर बातें कर सकते है ,समस्याओ का समाधान कर सकते हैहम बहने शाम होते ही सड़क के किनारे पुल पर बैठ कर उनका इन्तेजार करते थे ,उनके पास आते ही उनके साइकिल पर बैठ कर घर आते थे उनसे कितने स्कूल कि और माँ की शिकायते करदेते थे

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