मेरी मित्र प्रदान्य जो अभी मंडला में एक स्कूल की प्रधान अध्यापिका है,जिसेमैं कभी नही भुला सकती हम दोनों अलग -अलग स्कूलों में हायर सेकंडरी पास करके कॉलेज में दाखिल हुवे ,हमारा सेक्शन एक ही था .इकोनोमिक्स,हिन्दी साहित्य,सामाजिक शास्त्र उसकी और मेरी पसंद एक ही थी हम महादेवी वर्मा ,निराला शिवानी, शरत ,प्रेमचंद, के दुनिया में खोये रहते थेपरिवार के लोग भी हमारे दोस्ती को बहुत पसंद करते थे ,हमारी हिन्दी की प्रोफेसर मैडम प्रकाश हमें बहुत चाहती थी उन्होंने अपना लाइब्रेरी कार्ड भी हमें देदिया था जिससे हम पुस्तके बहुत दिनों तक अपने पास ही रखते थे।
हमारे जैसे ही इंग्लिश मीडियम स्कूलों के कुछ स्टूडेंट्स भी हमारे कॉलेज में दाखिल हुवे उनसे भी काफ्फी कुछ सीखने को मिला,उनमे उषा नायडू बेस्ट थी उसने हमें बहुत अजीज थी
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