मै अक्सर पिताजी से कहती थी की आप क्यो सबके साथ मिलते नही हो तो कहते थे कि तुम लोग ही मेरी जिंदगी हो तुम्हारे सिवा मुझे कुछ नही चाहिए तुम किसी बात पर मत घबराना किस्सी से मत डरना ,अगर कोई तुम से झगडा करे या कोई भी परेशानी दे तो उनका डटकर सामना करो अपना जीवन अपनी तरह से जियो ,अपने काम के किसी पर निर्भर मत होना जहा तक हो सके किसी से मादा मत लेना
वे स्वयं भी हमारे जिंदगियों में अधिक दखल नही देते थे फ़िर एकदिन अचानक उन्होंने हमसे अलविदा लेलिया ,कितनी खामोशी से उन्होंने निर्मोही बनकर अपने लाडली बेटियों और नन्हे से बेटे को छोड़कर परलोक सिधार गए
मुझे आज भी वोह काली रात याद है जब माँ खिड़की के पास खड़े बहार देख रही थी ,दुसरे दिन हमें नए किराये के माकन में जाना था जिंदगी के नए मंजिलो को तय करना थाहम सब भाई बहन नीचे चार पाई पर सोये हुवे थे अचानक मेरी नींद खुल गई मैंने उनको देखा मुझे बहुत दुःख लगा क्योंकि मेरी माँ बहुत सीधी सादी गृहणी थी उनको चूल्हे के सिवा कुछ नही आता था उनपर सारा दारोमदार आ पडा मई नही जानती माँ के अन्दर कितने तूफ़ान उमड़ रहे थे ,पर मैंने अपने आप से एक कसम लिया कि जिंदगी मई माँ कि जितनी हो सके मदद करुँगी
दुसरे दिन हम नई मंजिलो कि तरफ़ निकल पड़े हमे नही मालू किस तरफ़ जाना है ,कितने दूर जाना है ,कैसी कैसी मंजिले हमारी राह देख रही थीकितनी ही बातें है उसदिन मुझे नही मालूम पर लगता है कि अगर एक और मौका मिले तो काश और अची तरह से पापा के साथ और भी अधिक वक्त निकल सकूकाआआआआआआआआश ऐसा हो सकता,
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भावना अच्छी है। कहते भी हैं कि - "तेरी याद आती है तेरे जाने के बाद" खैर -- ऐसा दिन तो सबके जीवन में आता ही है।
ReplyDeleteएक आग्रह - पोस्ट करने से पहले सम्पादन अवश्य कर लें - टाइपिंग मिस्टेक है।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
aapne to rula hi diya.....
ReplyDeleteany way aapke kasm mujhe pasand aaye...
meri shubhkamnaye aapke sath hai....
Kitna achha lagta wo din yaad karana..ek alaghe duniyanme chale jana..!
ReplyDeletehttp://shamasansmaran.blogspot.com
http://kavitasbyshama.blogspot.com
http://lalitlekh.blogspot.com
http://aajtakyahantak.blogspot.com
प्रिय मित्र,
ReplyDeleteजश्ने-आजादी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. आज़ादी मुबारक हो.
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उल्टा तीर पर पूरे अगस्त भर आज़ादी का जश्न "एक चिट्ठी देश के नाम लिखकर" मनाइए- बस इस अगस्त तक. आपकी चिट्ठी २९ अगस्त ०९ तक हमें आपकी तस्वीर व संक्षिप्त परिचय के साथ भेज दीजिये.
आभार.
विजिट करें;
उल्टा तीर
http://ultateer.blogspot.com
अमित के सागर
gya waqt lot nahi pata..or jane wale kabhi nahi lot te..achhi post...bhawnao se bhari...
ReplyDeleteNiraliजी
ReplyDeleteआपने जीवन के बडे ही भावात्मक पहलु पर लिख मुझे भी रुला दिया। आपके परिवार मे सभी शुभ मगल हो, आप और हम पिताजी की कमी तो पुरा नही कर सकते किन्तु उनके बाताए आदर्शो पर चलकर उनके प्रति अथाह प्यार को सच्ची भावॉन्जली दे सकते है।
आभार।
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर